राजा शिवाजी मूवी रिव्यू: रितेश देशमुख की ऐतिहासिक फिल्म ने सिनेमाघरों में मचाया तहलका
मराठी सिनेमा के फलक पर साल 2026 की सबसे भव्य और महत्वाकांक्षी फिल्म 'राजा शिवाजी' आखिरकार 1 मई को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रितेश देशमुख के निर्देशन और मुख्य अभिनय वाली इस फिल्म को लेकर जिस तरह का उन्माद दर्शकों में देखा जा रहा है, उसने व्यापार विश्लेषकों को भी अचंभित कर दिया है। यह फिल्म सिर्फ एक ऐतिहासिक गाथा नहीं, बल्कि रितेश देशमुख का वह 'ड्रीम प्रोजेक्ट' है जिसे उन्होंने बीते कई वर्षों के गहन शोध और समर्पण से सींचा है। फिल्म के पर्दे पर आते ही सोशल मीडिया से लेकर सिनेमाई गलियारों तक, इसे भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली दस्तावेज़ बताया जा रहा है जो शौर्य, रणनीति और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा संगम है।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और 'स्वराज्य' की स्थापना के संकल्प पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को 17वीं शताब्दी के उस कालखंड में ले जाती है, जहाँ एक महान योद्धा का उदय हो रहा था। फिल्म की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मराठी सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म (लगभग 100 करोड़ रुपये का बजट) बताया जा रहा है। रितेश देशमुख ने न केवल शिवाजी महाराज की भूमिका में जान फूंकी है, बल्कि निर्देशक के तौर पर भी उन्होंने एक ऐसी सिनेमाई भाषा का प्रयोग किया है जो दर्शकों को भावुक करने के साथ-साथ गर्व से भर देती है। फिल्म की पटकथा में बारीकियों का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे यह महज एक मारधाड़ वाली फिल्म न रहकर एक गहरे वैचारिक संघर्ष की कहानी बन गई है।
रिलीज के पहले दिन ही फिल्म को समीक्षकों और आम जनता की ओर से जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, वे इसे 'ब्लॉकबस्टर' की श्रेणी में खड़ा करती हैं। अजय-अतुल का रोंगटे खड़े कर देने वाला संगीत और भव्य युद्ध दृश्यों ने फिल्म के प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया है। जानकार मानते हैं कि यह फिल्म मराठी सिनेमा के दायरे को तोड़कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। फिल्म में संजय दत्त और अभिषेक बच्चन जैसे सितारों की मौजूदगी ने इसके कैनवास को और भी व्यापक बना दिया है। 'राजा शिवाजी' ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी ऐतिहासिक फिल्मों के प्रति एक नई चेतना जागृत कर दी है।