कला जगत के एक बड़े अध्याय का अंत: आखिर क्यों शांत हो गई वह आवाज जिसने थिएटर से सिल्वर स्क्रीन तक मचाया था तहलका?
भारतीय कला और सिनेमा के क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने अभिनय के पारखियों और रंगमंच के प्रेमियों को गहरे शोक में डाल दिया है। कोल्लम स्थित पट्टाथानम के एक आवास से आई इस सूचना ने प्रशंसकों के बीच एक खालीपन पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे इस दिग्गज व्यक्तित्व ने 71 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों और परिवार के करीबियों के अनुसार, वह बढ़ती उम्र के साथ होने वाली शारीरिक जटिलताओं का सामना कर रहे थे, जिसके चलते वह बीते कुछ समय से उपचाराधीन थे। इस दुखद घड़ी में उनकी पत्नी संध्या राजेंद्रन उनके साथ रहीं, जो खुद भी कला जगत का हिस्सा रही हैं।
त्रिशूर जिले के त्रितल्लूर से शुरू हुआ यह सफर न केवल संघर्षों से भरा था, बल्कि इसमें सफलता की एक ऐसी इबारत लिखी गई थी जिसे आने वाली पीढ़ियां एक मिसाल के तौर पर देखेंगी। अपनी शुरुआती शिक्षा के दौरान ही उन्होंने मंच की अहमियत को समझ लिया था और त्रिशूर के स्कूल में नाटकों के माध्यम से अपनी कला को निखारना शुरू किया। कॉलेज के बाद जब उन्होंने अपनी प्रतिभा को एक पेशेवर मोड़ देने का फैसला किया, तो वह सीधे दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) पहुंचे। वहां से उन्होंने अभिनय की बारीकियों को न केवल समझा बल्कि प्रथम श्रेणी में स्नातक होकर अपनी असाधारण योग्यता का प्रमाण भी दिया।
सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में कदम रखने से पहले, इस कलाकार ने पुणे के मशहूर फिल्म संस्थान से तकनीकी कौशल भी हासिल किया, जिससे उनके काम में एक अलग तरह की गहराई नजर आती थी। अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्होंने कई यादगार कृतियां दर्शकों को समर्पित कीं। अब जब उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, तब पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके पैतृक गांव त्रितल्लूर में सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार, 27 मार्च को उनके पैतृक निवास स्थान पर ही संपन्न किया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए कला और राजनीति जगत के कई बड़े नामों के जुटने की संभावना है।