संजय कपूर संपत्ति विवाद में नया मोड़: रानी कपूर की याचिका पर हाई कोर्ट में बदली बेंच, 29 जनवरी को अगली सुनवाई

Update: 2026-01-29 09:26 GMT

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में उस समय नया घटनाक्रम सामने आया जब उनकी मां रानी कपूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करते हुए अपने नाम से बनाए गए पारिवारिक ट्रस्ट को ही अवैध घोषित करने की मांग की। रानी कपूर का आरोप है कि जिस ट्रस्ट के जरिए उनकी संपत्तियों का प्रबंधन किया जा रहा है, उसका गठन उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया था और इसका उद्देश्य उनकी संपत्ति को गैर-कानूनी ढंग से स्थानांतरित करना था।

रानी कपूर ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया है कि तथाकथित आरके फैमिली ट्रस्ट का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने के लिए किया गया। उन्होंने इसे धोखाधड़ी की साजिश बताते हुए ट्रस्ट को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके हस्ताक्षर और सहमति के बिना कानूनी दस्तावेज तैयार किए गए, जिनके आधार पर संपत्तियों का नियंत्रण अन्य पारिवारिक सदस्यों को सौंप दिया गया।

इस मामले में बुधवार को उस समय अहम मोड़ आया जब दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विकास महाजन ने रानी कपूर द्वारा दायर दीवानी मुकदमे की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, न्यायमूर्ति महाजन ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई न करने का निर्णय लिया, जिसके बाद अदालत ने केस को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अब इस विवाद की सुनवाई गुरुवार, 29 जनवरी को नई बेंच के सामने की जाएगी। इस दौरान कोर्ट ने रानी कपूर की उस मांग को तत्काल स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने संजय कपूर की मृत्यु से पहले अस्तित्व में रहे पारिवारिक ट्रस्ट के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश मांगा था। अदालत ने कहा कि इस चरण पर ऐसे किसी अंतरिम संरक्षण की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने रानी कपूर की याचिका पर संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया। कोर्ट ने आरके फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने संबंधी याचिका पर समन जारी करते हुए संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर सहित 22 अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष अदालत में रखें।

गौरतलब है कि संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्तियों, कंपनियों और ट्रस्ट संरचनाओं को लेकर परिवार के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें ट्रस्ट कानून, उत्तराधिकार अधिकार और संपत्ति हस्तांतरण की वैधानिक प्रक्रिया जैसे कई जटिल कानूनी पहलू जुड़ चुके हैं।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि रानी कपूर द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों की न्यायिक जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पारिवारिक ट्रस्ट की वैधता पर कोई निर्णायक आदेश पारित किया जाएगा।

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