'एक युग का अंत, व्यक्तिगत क्षति': आशा भोसले के निधन पर भावुक हुए पीएम मोदी, साझा कीं यादें

एक युग का अंत, व्यक्तिगत क्षति: आशा भोसले के निधन पर भावुक हुए पीएम मोदी, साझा कीं यादें
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सुर साम्राज्ञी आशा भोसले के महाप्रयाण पर देश और दुनिया से शोक संवेदनाओं का तांता लगा हुआ है, इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख प्रकट करते हुए इसे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक अत्यंत भावुक संदेश साझा करते हुए दिवंगत गायिका को देश की सबसे प्रभावशाली और बहुमुखी प्रतिभाओं में से एक करार दिया। उन्होंने आशा जी के साथ बिताए गए गौरवशाली पलों की कुछ पुरानी और यादगार तस्वीरों को भी सार्वजनिक किया, जो उनके बीच के आत्मीय संबंधों की गहराई को बयां कर रही थीं। पीएम मोदी ने अपनी श्रद्धांजलि में इस बात पर जोर दिया कि आशा भोसले की आवाज महज एक कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक अभिन्न हिस्सा थी।

प्रधानमंत्री ने अपने विस्तृत संदेश में आशा भोसले के आठ दशकों से अधिक लंबे संगीत सफर को असाधारण बताते हुए कहा कि उनकी गायकी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संगीत की विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उन्होंने उल्लेख किया कि चाहे वह दिल को छू लेने वाले भावुक गीत हों या फिर ऊर्जा से लबरेज रचनाएं, आशा जी की आवाज में एक ऐसी अद्वितीय चमक और आकर्षण था जो दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों को सीधे स्पर्श करता था। प्रधानमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए लिखा कि उनके साथ हुई मुलाकातें और चर्चाएं उनके मानस पटल पर हमेशा अंकित रहेंगी। उन्होंने कहा कि आशा जी का व्यक्तित्व और उनकी सहजता उन्हें एक महान कलाकार के साथ-साथ एक महान इंसान भी बनाती थी।

शोक संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए उनके विशाल प्रशंसक वर्ग, संगीत जगत और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने विश्वास जताया कि भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली विरासत आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। प्रधानमंत्री ने भावुक लहजे में कहा कि उनके गीत लोगों के जीवन के सुख-दुख के क्षणों में हमेशा गूंजते रहेंगे और उन्हें अमर बनाए रखेंगे। यह संदेश केवल एक राजनेता की ओर से दी गई श्रद्धांजलि भर नहीं थी, बल्कि एक कला प्रेमी की ओर से उस महान कलाकार को दी गई विनम्र विदाई थी जिसने भारतीय संगीत के इतिहास को अपने सुरों से स्वर्ण अक्षरों में लिखा।

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