फिल्म सेट पर चीख और अनकहे डर का साया: क्या है 'प्रयागराज की चर्चित शख्सियत' के उन 10 स्पर्शों का रहस्य?

फिल्म सेट पर चीख और अनकहे डर का साया: क्या है प्रयागराज की चर्चित शख्सियत के उन 10 स्पर्शों का रहस्य?
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केरल के तटीय शहर कोच्चि में आयोजित एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस ने फिल्म जगत के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रयागराज के कुंभ मेले के दौरान अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली मोनालिसा भोंसले ने एक फिल्म के सेट पर घटी उन घटनाओं का कच्चा चिट्ठा खोला है, जिन्होंने न केवल उनके आत्मसम्मान को झकझोर दिया बल्कि एक बड़े विवाद को भी जन्म दे दिया है। मोनालिसा ने सीधे तौर पर फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' के निर्देशक सनोज मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यस्थल पर होने वाले व्यवहार और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह बात सामने आई कि विवाद सिर्फ काम के दौरान हुए व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अब जीवन पर मंडराते खतरों से भी जुड़ चुके हैं।


मोनालिसा ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में खुलासा किया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें कई बार असहज स्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, निर्देशक सनोज मिश्रा का आचरण पेशेवर मर्यादाओं से कोसों दूर था और उनके द्वारा की गई हरकतें किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं थीं। प्रेस से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक नहीं बल्कि करीब दस बार उन्हें गलत तरीके से छुआ गया, जिसने उन्हें मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया। विडंबना यह रही कि जब उन्होंने इस अपमानजनक व्यवहार की शिकायत अपने परिवार से की, तो उन्हें वह संबल नहीं मिला जिसकी वे उम्मीद कर रही थीं। इसके विपरीत, उन्हें पहली फिल्म होने का वास्ता देकर चुप रहने या समझौता करने की नसीहत दी गई। मोनालिसा का यह बयान कि 'क्या करियर की शुरुआत के लिए अस्मत दांव पर लगाना जरूरी है' अब सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श का मुख्य केंद्र बन गया है।


यह मामला केवल आरोपों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब इसमें आपराधिक धमकियों का एंगल भी जुड़ गया है। मोनालिसा ने दावा किया है कि इस सच्चाई को सामने लाने के बाद से उन्हें और उनके पति को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनके विरोध में न केवल पोस्टर जलाए जा रहे हैं, बल्कि अज्ञात तत्वों द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और डराने का सिलसिला भी जारी है। भय के साये में जी रही मोनालिसा ने अब सुरक्षा के लिए सीधे सत्तानशीं दरवाजों पर दस्तक दी है। उन्होंने केंद्र सरकार के साथ-साथ केरल और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों से हस्तक्षेप करने और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की भावुक अपील की है, ताकि न्याय की इस लड़ाई में उन्हें अकेला न पड़ना पड़े।


फिलहाल, फिल्म जगत के इस संवेदनशील मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जहां एक तरफ फिल्म निर्देशक के पक्ष और उनके सहयोगियों की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ मोनालिसा के इन तीखे सवालों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे का अंधेरा कितना गहरा है। इस घटना ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया के दौरान महिला कलाकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बने तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि इन आरोपों की जांच किस दिशा में मुड़ती है और क्या एक उभरती हुई कलाकार को वह न्याय मिल पाएगा जिसकी वह मांग कर रही हैं।

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