कॉमेडी के दिग्गज असरानी की 85वीं जयंती: जयपुर से सिनेमा तक का सफर, रेडियो से मिली पहली पहचान
हिंदी सिनेमा को दशकों तक हँसी और यादगार किरदार देने वाले अभिनेता असरानी आज अपनी 85वीं जन्म वर्षगांठ मना रहे हैं। इस खास मौके पर उनके जीवन से जुड़े वे किस्से याद किए जा रहे हैं, जिन्होंने उन्हें एक सामान्य कारोबारी परिवार से निकालकर अभिनय की दुनिया का चमकता सितारा बना दिया। अपने सहज अभिनय, बेहतरीन टाइमिंग और अलग अंदाज़ की कॉमेडी के लिए पहचाने जाने वाले असरानी ने भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई।
असरानी का असली नाम गोवर्धन असरानी है। उनका जन्म जयपुर में हुआ, जहां उनके पिता की कार्पेट की दुकान थी। परिवार की इच्छा थी कि गोवर्धन आगे चलकर इसी पारिवारिक व्यवसाय को संभालें, लेकिन उनका रुझान बचपन से ही फिल्मों और अभिनय की ओर था। रंगमंच, संवाद और किरदारों की दुनिया उन्हें लगातार अपनी ओर खींचती रही। परिवार की उम्मीदों और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने पहले पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया।
असरानी ने जयपुर के राजस्थान कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में वॉयस आर्टिस्ट के रूप में काम किया। रेडियो पर काम करते हुए उनकी आवाज़, संवाद अदायगी और अभिनय क्षमता को निखारने का मौका मिला। यही अनुभव आगे चलकर उनके फिल्मी करियर की मजबूत नींव साबित हुआ। माइक्रोफोन के सामने बोलते हुए उन्होंने शब्दों के उतार-चढ़ाव और भावनाओं को व्यक्त करने की कला सीखी, जिसने उन्हें कैमरे के सामने भी सहज बना दिया।
आज जब असरानी की 85वीं जयंती मनाई जा रही है, तो उनका जीवन संघर्ष, लगन और सपनों को साकार करने की मिसाल के रूप में देखा जाता है। जयपुर की गलियों से निकलकर सिनेमा की दुनिया तक पहुंचने का उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर रास्ते खुद बन जाते हैं। असरानी न सिर्फ एक अभिनेता हैं, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस दौर की पहचान हैं, जिसने दर्शकों को हँसी के साथ सोचने का मौका भी दिया।